भारतीय शेयर बाजार में 4 मार्च को क्यों आया ऐतिहासिक गोरखधंधा? जानिए कब तक जारी रहेगी यह बिकवाली
तारीख: 4 मार्च, 2026
भारतीय शेयर बाजार में आज (4 मार्च) निवेशकों को करारा झटका लगा। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,122 अंक से अधिक लुढ़ककर 79,116 पर और निफ्टी 385 अंक गिरकर 24,480 के स्तर पर बंद हुआ । कारोबार के दौरान तो स्थिति और भी विकट हो गई थी, जहां सेंसेक्स 1,600 अंक से अधिक टूट गया था और निफ्टी 24,300 के स्तर से नीचे चला गया था । इस गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी और बाजार से करीब 11 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ । आइए समझते हैं कि आखिर यह बिकवाली क्यों आई और यह सिलसिला कब तक जारी रह सकता है।
4 मार्च को बिकवाली के मुख्य कारण (Causes of the Sell-off
इस भारी गिरावट के लिए कोई एक नहीं, बल्कि कई वजहें एक साथ जिम्मेदार हैं, जिसने बाजार को चारों तरफ से घेर लिया।
1. बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions):
बाजार में आई इस तबाही की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। इस संघर्ष के बढ़ने की आशंका ने पूरे विश्व बाजार को हिलाकर रख दिया है। । इस युद्ध के लंबा खिंचने का डर निवेशकों के मन में बैठ गया है। मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी सौरभ मुखर्जी ने कहा कि नई चिंता यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति खुद कह रहे हैं कि युद्ध एक महीने या उससे अधिक समय तक चल सकता है, जिससे कई तरह के व्यवधान पैदा होंगे ।
2. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें (Surge in Crude Oil Prices
भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आपूर्ति बाधित होने के डर से ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जो 19 महीने का उच्चतम स्तर है । भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी 85% तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, यह एक बड़ा झटका है। इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा, चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ेगा, महंगाई को बढ़ावा मिलेगा और कॉरपोरेट कमाई पर दबाव पड़ेगा ।
3. रुपये में रिकॉर्ड गिरावट (Weak Indian Rupee):
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी के चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.14 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया । कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों (FPIs) के लिए भारतीय बाजार से रिटर्न को कम कर देता है, जिससे वे बिकवाली करने को मजबूर होते हैं ।
4. वैश्विक बाजारों में भारी बिकवाली (Global Risk-Off Sentiment
यह गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं थी। अमेरिका से लेकर एशिया तक, सभी बाजारों में बिकवाली का दौर चला। जापान का निक्की 4% से अधिक टूटा, जबकि हॉन्ग कॉन्ग का हैंग सेंग 2% से अधिक लुढ़का। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में तो 10% से अधिक की गिरावट के कारण कारोबार अस्थायी रूप से रोकना पड़ा ।
कब तक जारी रहेगी यह बिकवाली? (How Long Will the Selling Continue?)
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि आखिर यह बिकवाली कब थमेगी? विश्लेषकों की राय बंटी हुई है, लेकिन कुछ संकेत हमें आगे की राह दिखा सकते हैं।
· अल्पकालिक दृष्टिकोण (Short-term View): तकनीकी रूप से देखें तो बाजार की रुझान कमजोर बनी हुई है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नागराज शेट्टी के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,300-24,100 का स्तर अहम सपोर्ट जोन है। अगर यह टूटता है तो और गिरावट आ सकती है। हालांकि, इतनी तेज गिरावट के बाद कभी-कभी तकनीकी रिबाउंड (Technical Bounce) आ सकता है । कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान का मानना है कि 24,300 का स्तर नीचे की तरफ अहम है, और इसके नीचे जाने पर बाजार 24,000 तक फिसल सकता है ।
· मध्यम से दीर्घकालिक दृष्टिकोण (Medium to Long-term View): विशेषज्ञों का मानना है कि बिकवाली तब तक जारी रह सकती है, जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती।
· मॉर्गन स्टेनली का नजरिया: मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि यह गिरावट संरचनात्मक नहीं बल्कि अस्थायी है। उसने दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स का लक्ष्य 95,000 बरकरार रखा है। हालांकि, उसने यह भी कहा है कि यदि तेल की कीमतें बहुत अधिक बढ़ती हैं और वैश्विक वृद्धि धीमी पड़ती है, तो सेंसेक्स 76,000 तक गिर सकता है ।
· विदेशी निवेशकों की भूमिका (FPI Flows): विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली इस समय सबसे बड़ी चिंता है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर आय (earnings), रुपये में गिरावट और ऊंचे वैल्यूएशन के कारण FPIs भारतीय शेयरों को लेकर आश्वस्त नहीं हैं । अच्छी बात यह है कि हाल ही में अमेरिका और यूरोप के साथ हुए व्यापार समझौतों (Trade Deals) से लंबी अवधि में विदेशी निवेशकों का भरोसा लौट सकता है और रुपये को स्थिरता मिल सकती है ।
निवेशकों को क्या करना चाहिए? (What Should Investors Do?)
इस अनिश्चितता के माहौल में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:
1. घबराएं नहीं: लंबी अवधि के निवेशकों को घबराकर बेचना नहीं चाहिए। यह गिरावट अस्थायी हो सकती है।
2. गुणवत्ता पर ध्यान दें: सौरभ मुखर्जी के अनुसार, अनिश्चितता के समय में उच्च गुणवत्ता वाले बड़े शेयरों (large-cap stocks) में निवेश बेहतर प्रदर्शन करते हैं। छोटे और मझोले शेयरों (small & midcap) में सतर्क रहने की जरूरत है ।
3. विविधीकरण (Diversification): अपने पोर्टफोलियो को विभिन्न परिसंपत्तियों (जैसे सोना) और भौगोलिक क्षेत्रों में बांटकर जोखिम कम किया जा सकता है
4 मार्च की बिकवाली भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और कमजोर रुपये का एक "परफेक्ट स्टॉर्म" थी। यह बिकवाली तब तक जारी रह सकती है, जब तक ईरान-अमेरिका संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव (volatility) बना रहेगा। लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए, व्यापार समझौतों और आरबीआई की नीतियों के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।
Disclaimer यह लेख केवल शैक्षिक और जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों, बाजार विश्लेषणों और उपलब्ध डेटा पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह (Investment Advice) नहीं है।

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