भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: कारण, प्रभाव और आगे की राह - अमेरिकी कारकों के साथ विश्लेषण

 

📉 भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: कारण, प्रभाव और आगे की राह - अमेरिकी कारकों के साथ विश्लेषण

सोमवार, 2 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने एक ऐतिहासिक गिरावट देखी। केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किए जाने के तुरंत बाद, सेंसेक्स और निफ्टी में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों में हड़कंप मच गया। बजट से पहले हल्की तेजी के साथ खुला बाजार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण के दौरान अचानक लुढ़कना शुरू हो गया ।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स लगभग 2,000 अंक से अधिक टूट गया और निफ्टी 24,800 के स्तर से नीचे आ गया। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक दिन में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये घट गया, जो निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका था। हालांकि यह गिरावट बजट के कारण आई, लेकिन पूरे फरवरी महीने में बाजार पर अमेरिका (US) से जुड़े कई कारकों का गहरा असर रहा।

इस गिरावट के प्रमुख कारण क्या थे?

इस भारी गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक, दोनों तरह के कारक जिम्मेदार थे। 🇮🇳 घरेलू कारण (Domestic Factors)

1. एफ एंड ओ (F&O) ट्रेडिंग पर एसटीटी (STT) में भारी बढ़ोतरी

यह गिरावट का सबसे बड़ा और तात्कालिक कारण था। वित्त मंत्री ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में आकस्मिक और भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा।

· फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया ।
· ऑप्शंस पर STT को 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया ।

  बाजार को STT में कटौती की उम्मीद थी, इसलिए इस फैसले ने निवेशकों के सेंटीमेंट को तगड़ा झटका दिया और सभी ने जोखिम कम करने के लिए अपनी पोजीशन काटनी शुरू कर दीं।

2. शेयर बायबैक पर टैक्स का प्रस्ताव

सरकार ने प्रस्ताव किया कि कंपनियों द्वारा अपने शेयरों के बायबैक से होने वाली आय को अब शेयरधारकों के लिए पूंजीगत लाभ (Capital Gain) के रूप में करयोग्य माना जाएगा। इससे कंपनियों के लिए नकदी वापस करने का यह रास्ता कम आकर्षक हो गया।

🇺🇸 वैश्विक / अमेरिकी कारण (US Factors)

बजट के बाद आई इस गिरावट को अमेरिका से आ रहे नकारात्मक संकेतों ने और बढ़ा दिया।

3. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला और नए टैरिफ (टैक्स) की अफरा-तफरी

भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा वैश्विक झटका अमेरिका से आया। 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के उस आदेश को पलट दिया, जिसके तहत भारत सहित कई देशों पर भारी रीसिप्रोकल टैरिफ (जवाबी कर) लगाए गए थे । बाजार को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन इसके तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने नया 10% वैश्विक टैरिफ लगा दिया, जिसे बढ़ाकर 15% करने की बात कही गई । इस अनिश्चितता ने दुनिया भर के निवेशकों का भरोसा तोड़ा और उन्होंने जोखिम भरे बाजारों (जैसे भारत) से पैसा निकालना शुरू कर दिया।

4. विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव और डॉलर की मजबूती के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे थे।

· फरवरी 2026 में FIIs ने भारतीय इक्विटी में भारी बिकवाली जारी रखी। 16 फरवरी तक के आंकड़ों के अनुसार, FIIs ने फरवरी में अब तक ₹2,345.69 करोड़ के शेयर बेचे थे ।

· 26 फरवरी को अकेले एक दिन में FIIs ने ₹3,465.99 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर और दबाव पड़ा ।

· विश्लेषकों के अनुसार, "अमेरिका में AI को लेकर बढ़ी चिंता, ईरान को लेकर अनिश्चितता और टैरिफ की अफरा-तफरी" ने वैश्विक बाजारों को बेचैन कर दिया था, जिसका असर भारत पर भी पड़ा ।

5. आईटी (IT) सेक्टर पर अमेरिकी दबाव

अमेरिका में आईटी कंपनियों को लेकर बढ़ी चिंता का सीधा असर भारतीय आईटी शेयरों पर पड़ा। 23 फरवरी को अमेरिका में IBM के शेयर 13% से अधिक गिर गए, क्योंकि AI स्टार्टअप Anthropic ने दावा किया कि उसका टूल IBM के पुराने सिस्टम को बदल सकता है । इस AI खतरे (AI jitters) की वजह से अगले ही दिन 24 फरवरी को भारत में निफ्टी IT इंडेक्स 2.27% टूट गया । टेक्नोलॉजी सेक्टर में यह गिरावट पूरे बाजार के मूड को खराब करने के लिए काफी थी।

🇮🇳 अन्य घरेलू कारक

6. ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली और सेक्टर-विशिष्ट दबाव

बजट से पहले बाजार में हल्की तेजी देखी गई थी। बजट में उम्मीदों के विपरीत घोषणाओं के बाद, निवेशकों ने अपने मुनाफे को भुनाना शुरू कर दिया। इससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। मेटल शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, जबकि PSU बैंकों पर भी दबाव बना रहा।

7. रुपये पर दबाव और RBI का हस्तक्षेप

बाजार में गिरावट और FIIs की बिकवाली के कारण रुपये पर भी काफी दबाव देखा गया। फरवरी की शुरुआत में बजट के बाद रुपया 91.85 के स्तर तक गया, जहाँ RBI को हस्तक्षेप करना पड़ा । पूरे महीने रुपया 90.80 से 91.00 के बीच कमजोर बना रहा, क्योंकि आयातकों (importers) द्वारा डॉलर की मांग और FIIs की बिकवाली जारी रही ।

बाजार पर तकनीकी नजरिया और आगे की राह

बजट वाले दिन निफ्टी ने सिर्फ 90 मिनट के भीतर अपने उच्चतम स्तर से 869 अंक का गोता लगाया और अंततः 1.96% की गिरावट के साथ बंद हुआ। इस गिरावट के बाद बाजार ने 24,900-25,450 के कंसॉलिडेशन रेंज को तोड़ दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी के आखिरी हफ्ते में बाजार ने कुछ सुधार दिखाया, लेकिन अमेरिका से लगातार आ रहे नए टैरिफ के ऐलान और FIIs की बिकवाली ने बाजार की रफ्तार को रोके रखा । पीयूष गोयल और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के बीच हुई व्यापार वार्ता से उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन जब तक ठोस समझौता नहीं हो जाता, बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है ।

निवेशकों को सलाह:

· वैश्विक संकेतों पर नजर: अमेरिका में ब्याज दरों, टैरिफ नीति और डॉलर इंडेक्स की चाल पर ध्यान दें।· FII गतिविधि पर निगरानी: विदेशी निवेशकों की बिकवाली कब रुकती है, यह बाजार की दिशा तय करेगा।घबराकर बेचने से बचें: मजबूत बुनियाद वाली कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करें। 2026 को शुरू हुई गिरावट सिर्फ बजट का नतीजा नहीं थी, बल्कि अमेरिका से आ रही टैरिफ की अनिश्चितता, AI को लेकर डर और FIIs द्वारा लगातार की जा रही भारी बिकवाली ने इसे और गहरा कर दिया। अब सबकी निगाहें अमेरिका के अगले कदम और भारत-अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते पर टिकी हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल शैक्षिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है, इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


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